विशेष: आकांक्षी नेपाल और उभरते भारत के बीच पुनः मजबूत संबंध कैसे स्थापित हो सकते हैं?
– रवि लामिछाने
आज का नेपाल किसी अनिश्चित भविष्य की ओर नहीं बढ़ रहा है, बल्कि एक अत्यंत आकांक्षी और महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण को अपना रहा है।
किसी भी राजनीतिक इतिहास में यह सामान्य बात नहीं है कि गैर-दलीय पेशेवरों और राजनीति में नए चेहरों द्वारा स्थापित किसी दल ने चार वर्ष से भी कम समय में संसद में लगभग दो-तिहाई बहुमत प्राप्त कर लिया हो और दुनिया के सबसे युवा प्रधानमंत्री के चुनाव का मार्ग प्रशस्त किया हो। इसलिए नेपाल में क्या हो रहा है और देश किस दिशा में आगे बढ़ रहा है, इसे लेकर वैश्विक स्तर पर उत्सुकता होना स्वाभाविक है। एक हजार मील से अधिक लंबी खुली सीमा साझा करने वाले पड़ोसी भारत के लिए यह रुचि और भी स्वाभाविक है।
नेपाल के इस परिवर्तन की कहानी सड़क हिंसा, सैन्य तख्तापलट, विदेशी हस्तक्षेप या संवैधानिक शून्यता से नहीं लिखी गई है। यह एक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक “मतपेटी क्रांति” (Ballot-Box Revolution) का परिणाम है। ऐसे समय में जब दुनिया के कई समाज ध्रुवीकरण, सत्ता के प्रति अविश्वास और भ्रष्ट राजनीति से परेशान होकर अलोकतांत्रिक विकल्पों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, नेपाल ने साबित किया है कि लोकतंत्र आज भी बहुलतावादी समाज में परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम बन सकता है।
आज का नेपाल अनिश्चितता की ओर नहीं, बल्कि एक समृद्ध और जीवंत लोकतंत्र की आकांक्षी यात्रा पर अग्रसर है। हमारे मूल सिद्धांत स्पष्ट हैं—अटल सुशासन, जनता के प्रति प्रत्यक्ष जवाबदेही और विकास के माध्यम से परिवर्तन।
नया राजनीतिक यथार्थ
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) आज नेपाल की नई राजनीतिक वास्तविकता बन चुकी है। यह एक युवा शक्ति है, जिसने जड़ और पुरानी राजनीतिक संरचना को चुनौती दी है। इसने युवाओं को परिणामोन्मुख राजनीति में भागीदारी के लिए प्रेरित करते हुए देश के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है।
हम जानते हैं कि रास्वपा को मिला जनसमर्थन केवल आक्रोश की अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि आशा और परिवर्तन में विश्वास का प्रतीक भी है। यही कारण है कि युवा, समावेशी और निष्कलंक प्रतिभाएँ जनमत के माध्यम से नेतृत्व तक पहुँचने में सफल हुई हैं।
हमारे पास आज नेपाल की विदेश नीति को बदलने के लिए सबसे बड़ी पूंजी है—हम अतीत के बोझ से मुक्त हैं। हम पुरानी कटुताओं और वैमनस्यताओं से बंधे नहीं हैं। हम संप्रभु संधियों और जनता के स्तर पर बने आत्मीय संबंधों का सम्मान करते हैं, लेकिन पूर्व नेताओं के छोटे-छोटे स्वार्थों और गुप्त समझौतों के जाल में फँसे नहीं हैं।
हम भारत और दुनिया को खुले मन, स्पष्ट दृष्टि और पारदर्शी उद्देश्यों के साथ देखते हैं। हमारा एकमात्र लक्ष्य नेपाल का आर्थिक रूपांतरण है।
नेपाल और भारत केवल दो राष्ट्र नहीं हैं, बल्कि एक गौरवशाली और प्राचीन सभ्यता के साझेदार हैं। भगवान राम की कथा तभी पूर्ण होती है जब जनकपुर और अयोध्या जुड़े हों। आस्था की पूर्णता तब प्राप्त होती है जब पशुपतिनाथ और केदारनाथ के बीच का संबंध मजबूत हो। महान सभ्यता की वास्तविक अनुभूति तब होती है जब लुंबिनी और बोधगया एक-दूसरे से जुड़े हों।