अनिल तिवारी / वीरगंज
जिला पुलिस कार्यालय पर्सा ने माघ महीने तक कुल 30 मादक पदार्थ (नशीले पदार्थ) से जुड़े मामले दर्ज किए हैं। पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया है कि भारत के रक्सौल से वीरगंज लाए गए अधिकांश नशीले पदार्थ वीरगंज कस्टम या आईसीपी कार्यालय की जांच प्रक्रिया पार करके ही नेपाल में प्रवेश करते हैं। हाल के दिनों में नेपाल–भारत सीमा पर बढ़ते अवैध कारोबार के कारण इस नाके पर हवाला (हुंडी) का धंधा भी तेजी से फल-फूल रहा है।
नेपाल–भारत सीमा के सभी नाकों पर सशस्त्र और जनपथ पुलिस की संयुक्त तैनाती और कड़ी जांच के दावे किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद करोड़ों रुपये मूल्य के तस्करी के सामान वीरगंज आसपास के गोदामों से पुलिस छापेमारी में बरामद किए जा रहे हैं। केवल पौष महीने में ही पर्सा पुलिस ने 6 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के तस्करी के सामान जब्त कर आवश्यक कार्रवाई के लिए राजस्व कार्यालय को सौंपा है।
इतना ही नहीं, पर्सा पुलिस के लिए नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार नियंत्रण हमेशा से एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हवाला कारोबार में भारतीय रुपये की तुलना में नेपाली रुपया 5 रुपये अधिक मजबूत बताया जा रहा है। नेपाल से मादक पदार्थ और सोने की तस्करी बढ़ने के कारण उसका भुगतान हवाला के माध्यम से नेपाल में आ रहा है, जिससे बाजार में 155 नेपाली रुपये के बदले 100 भारतीय रुपये की दर से लेनदेन हो रहा है, ऐसा व्यापारियों का कहना है।
जिला पुलिस प्रमुख के रूप में कोमल शाह के कार्यभार संभालने के बाद तस्करी और अवैध मुद्रा कारोबार पर सख्ती बढ़ाई गई है। इसके परिणामस्वरूप हवाला और नशीले पदार्थ के कारोबारी बड़ी संख्या में गिरफ्तार हो रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिले में पकड़ा गया अधिकांश हवाला धन और नशीले पदार्थ इसी सीमा नाके के रास्ते आए होते हैं।
कुछ दिन पहले ही वीरगंज में पुलिस ने स्रोत न खुले 20 लाख नेपाली रुपये के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया। बारा जिले के विश्रामपुर गांवपालिका वार्ड नंबर 4 निवासी 27 वर्षीय श्यामकिशोर प्रसाद साह को वीरगंज-16 रजत जयंती चौक से गिरफ्तार किया गया। पर्सा के पुलिस अधीक्षक कोमल शाह ने स्वयं पत्रकार सम्मेलन में इसकी जानकारी दी। लेकिन यह सवाल अब भी अनुत्तरित है कि इतनी बड़ी रकम कस्टम और सीमा जांच को कैसे पार कर गई?
देश में लोकतंत्र आए तीन दशक बीत चुके हैं। लोकतंत्र में नागरिकों के मौलिक अधिकार सर्वोपरि होते हैं और सिद्धांत यह होता है कि भले दस अपराधी छूट जाएं, लेकिन एक निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए। इसके बावजूद नेपाली सुरक्षा तंत्र आज भी पुराने पंचायती अंदाज में चलता दिखाई देता है।
नेपाल–भारत सीमा पर आगे सशस्त्र पुलिस और पीछे जनपथ पुलिस तैनात रहती है। नेपाल प्रवेश करने वाले प्रत्येक आम नागरिक को कई चरणों में जांच से गुजरना पड़ता है। लेकिन इसके बावजूद तराई के हर जिले के आंतरिक बाजारों, शहरों और गोदामों से करोड़ों रुपये के तस्करी के सामान पकड़े जा रहे हैं। नमक से लेकर सोना तक की तस्करी हर सीमा नाके से हो रही है, लेकिन सीमा पर तैनात कर्मियों पर ठोस कार्रवाई शायद ही देखने को मिलती है।
वीरगंज देश का प्रमुख प्रवेश द्वार है और इसे आर्थिक राजधानी भी कहा जाता है। यह शहर राज्य द्वारा वसूले जाने वाले करों का सबसे बड़ा हिस्सा देता है। नेपाल–भारत सीमा पर स्थित आईसीपी, ड्राई पोर्ट और कस्टम कार्यालयों के माध्यम से देश के कुल राजस्व का लगभग 43 प्रतिशत योगदान वीरगंज करता है। काठमांडू भेजे जाने वाले 75 प्रतिशत सामान भी इसी शहर से होकर जाते हैं। देश के कुल औद्योगिक कर में से 40 प्रतिशत वीरगंज क्षेत्र के उद्योगों से आता है। इस दृष्टि से वीरगंज पूरे देश की ‘लाइफलाइन’ है।
इसके बावजूद सीमा पर सबसे अधिक परेशानी वीरगंज और आसपास के आम लोगों को ही झेलनी पड़ती है। भारत के रक्सौल से घरेलू सामान लाने पर भी लोगों को कई बार जांच से गुजरना पड़ता है। केवल आधे किलोमीटर के दायरे में आधा दर्जन से अधिक जांच चौकियां मौजूद हैं, फिर भी नमक से लेकर सोना तक की खुलेआम तस्करी होती है।
रक्सौल से नेपाल में प्रवेश करते ही सबसे पहले मैत्री पुल पर सशस्त्र पुलिस की जांच होती है। इसके बाद शंकराचार्य द्वार के पास कोरोना डेस्क, इनरुवा पुलिस चौकी, कस्टम जांच, फिर से सशस्त्र पुलिस और कुछ ही मीटर आगे रजत जयंती चौक पर जनपथ पुलिस की जांच से गुजरना पड़ता है।
इतनी कड़ी जांच के बावजूद नशीले पदार्थ, सोना, हथियार और अन्य अवैध सामान इस नाके से आसानी से कैसे आ-जा रहे हैं? स्थानीय लोगों का आरोप है कि तस्करी रोकने के बजाय यह जांच प्रक्रिया संबंधित सभी निकायों की मिलीभगत और अवैध वसूली का माध्यम बन चुकी है। सशस्त्र पुलिस, जनपथ पुलिस और कस्टम जांचकर्मी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अवैध उगाही में शामिल हैं—यह यहां का कड़वा सच माना जाता है।
हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल भी भारत के पटना जाते समय सभी जांच प्रक्रियाओं से गुजरे, लेकिन उनके साथ पुलिस एस्कॉर्ट होने के कारण उन्हें कुछ ही मिनटों में सीमा पार करा दिया गया। नेकपा समाजवादी पार्टी, वीरगंज महानगर अध्यक्ष मनोज चौधरी का आरोप है कि सीमा पर जांच का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा नहीं, बल्कि पैसे की वसूली बन चुका है। उनके अनुसार तीन स्थानों—जनपथ पुलिस, सशस्त्र पुलिस और कस्टम—की जांच पर्याप्त है, बाकी केवल आम जनता को परेशान करने का तरीका है।
वहीं पर्सा पुलिस का कहना है कि आधे किलोमीटर में कई जांच चौकियां होना सीमा सुरक्षा की मजबूरी है। जिला पुलिस कार्यालय पर्सा के प्रवक्ता एवं डीएसपी दीपक गिरी के अनुसार सीमा सुरक्षा और तस्करी नियंत्रण की जिम्मेदारी सशस्त्र पुलिस की है, जबकि आंतरिक सुरक्षा जनपथ पुलिस देखती है, इसी कारण अलग-अलग स्थानों पर जांच होती है।
देश के आर्थिक संभावनाओं से भरे शहरों की बात हो तो सबसे पहले वीरगंज का नाम लिया जाता है। लेकिन वीरगंज की समृद्धि और विकास की बातें केवल चुनावी भाषणों तक ही सीमित रह गई हैं। तस्करी और सुरक्षा के नाम पर सीमा क्षेत्र के आम नागरिकों का शोषण हो रहा है, लेकिन जनप्रतिनिधियों की आंखें अब तक नहीं खुल पाई हैं।