काठमांडू: नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) के अध्यक्ष तथा पूर्व प्रधानमंत्री पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ ने कहा है कि वे इतिहास में खलनायक के रूप में स्थापित नहीं होना चाहते। रविवार को सार्वजनिक किए गए एक वीडियो संदेश में उन्होंने देश को “सही दिशा में न ले जाने तक विश्राम न लेने” की दृढ़ प्रतिबद्धता व्यक्त की।
वीडियो संदेश में उन्होंने हॉलीवुड का एक चर्चित संवाद उद्धृत करते हुए कहा,
“या तो तुम नायक के रूप में मरते हो, या खुद को खलनायक बनते देखने के लिए जीवित रहते हो।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि वे बहुत पहले ही राजनीतिक जीवन से अलग हो गए होते, तो शायद देश उन्हें एक नायक के रूप में ही याद करता। लेकिन वे आज भी सक्रिय इसलिए हैं क्योंकि देश को सही रास्ते पर ले जाने की जिम्मेदारी महसूस करते हैं।
उन्होंने कहा,
“मैं खलनायक बनकर इतिहास के पन्नों में खो जाना नहीं चाहता। देश को सही दिशा में न ले जाने तक विश्राम नहीं लूंगा।”
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जनता उन्हें जिस नजर से भी मूल्यांकन करे, वह उनका अधिकार है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में किए जाने वाले परिवर्तन उनकी उपस्थिति का अहसास कराएंगे। प्रचण्ड ने कहा कि वे नए विचारों और नई पीढ़ी के लिए हमेशा खुले हैं। लेकिन डिजिटल युग में सोशल मीडिया के जरिए फैलने वाली अफवाहों और भ्रामक प्रचार से सावधान रहने की अपील भी की।
उन्होंने कहा,
“हर चमकने वाली चीज हीरा नहीं होती। मैं यहाँ वोट मांगने नहीं आया हूँ, बल्कि स्वतंत्र सोच के लिए अपील करने आया हूँ।”
उन्होंने यह भी कहा कि आज की युवा पीढ़ी जिन मुद्दों — भ्रष्टाचार का अंत, पारदर्शिता और मजबूत सरकार — को उठा रही है, वे एजेंडा वे जनयुद्ध काल से ही उठाते आए हैं। राजनीतिक स्थिरता और विकास के लिए प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी प्रमुख की व्यवस्था आवश्यक होने की अपनी पुरानी धारणा दोहराते हुए उन्होंने वर्तमान संसदीय प्रणाली को “कुर्सी की खींचतान का खेल” बताया।
उन्होंने कहा,
“मेरी मांग और आपकी मांग एक ही है। मैं आप ही की पीढ़ी की सोच लेकर चलने वाला एक यात्री हूँ।”
प्रचण्ड का यह संदेश हाल के दिनों में उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उनकी प्रतिबद्धता और दृष्टिकोण को फिर से स्पष्ट करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।